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नमस्ते दोस्तों! Book Brevity में आपका फिर से स्वागत है।
आज हम एक बेहद खास विषय पर चर्चा करने के लिए यहाँ आए हैं, जो हम सभी की जिंदगी का सबसे बड़ा और सबसे ज़रूरी लक्ष्य होता है: अमीर बनने का सबसे आसान तरीका और Financial Freedom कैसे हासिल करें?
हम सभी अपनी ज़िंदगी में उस सुखद स्वतंत्रता को पाना चाहते हैं। वह आज़ादी, जहाँ हमें सिर्फ बिल चुकाने या पेट भरने के लिए काम करने की मजबूरी न हो। यह उस मानसिक शांति को पाने का नाम है, जहाँ पैसों से जुड़ा लगातार टेंशन आपकी ज़िंदगी पर हावी न हो। यह कोई luxury नहीं है, बल्कि एक मेंटल पीस है, जो financial freedom से आती है।
लेकिन अक्सर जब हम निवेश या wealth creation की बात करते हैं, तो दिमाग में जटिल रणनीतियाँ, फैंसी शब्द, या किसी विशेषज्ञ की सलाह लेने का ख्याल आता है। हमें लगता है कि यह सब आम इंसान के बस की बात नहीं है, यह बहुत जटिल विषय है।
आज हम इन सभी भ्रमों को तोड़ेंगे। हम सीखेंगे कि wealth create करना उतना मुश्किल नहीं है, जितना finance industry हमें दिखाना चाहती है। यह यात्रा सरलता और अनुशासन से तय की जा सकती है।
यह कहानी है Mr J. L. Collins की, जिन्होंने अपनी बेटी Jessica के लिए ये सारे निवेश के सबक एक किताब में लिखे थे, ताकि उनकी बेटी को कभी भी पैसों के बारे में ज्यादा टेंशन न लेनी पड़े।
| The Simple Path to Wealth by J. L. Collins Book Summary in Hindi |
Part 01: Author का सफर
Mr. J. L. Collins एक बार अपनी छोटी बेटी Jessica के साथ बात कर रहे थे, जहाँ वे उसे financial education दे रहे थे, ताकि वह बचपन से ही अच्छी financial habits बना सके। तभी उनकी बेटी ने कहा, "Dad, मुझे पता है कि पैसे बहुत ज़रूरी हैं, लेकिन मैं अपनी पूरी ज़िंदगी सिर्फ इसके बारे में सोचते हुए नहीं बिताना चाहती हूँ"। उनकी बेटी खुद देखती थी कि उनके पिता हमेशा पैसों के बारे में सोचते रहते थे। उनके दिन भर के हर फैसले में वह पैसों को कैसे calculate करते थे, और कैसे वह shopping करने से पहले हमेशा price tag देखते थे।
यह बात सुनकर Mr Collins काफी सोच में पड़ गए कि क्या वह ऐसा कुछ कर सकते थे अपनी बेटी के लिए, जिससे उसे पैसों के बारे में ज्यादा टेंशन न लेना पड़े। Infact, उनकी बेटी को पैसों के बारे में ज्यादा सोचना ही न पड़े।
Mr Collins ने अपना career एक बहुत ही humble background से शुरू किया था। उन्होंने अपना career एक bus boy की नौकरी से शुरू किया। फिर उन्होंने होटल में waiter और dish washer जैसी कई छोटी-मोटी नौकरियाँ भी की।
लेकिन उन्होंने खुद को investing की दुनिया के बारे में educated किया। उन्होंने निवेश के बारे में एक ऐसा secrets जान लिया, जिसकी वजह से आज वह एक बहुत ही successful investor हैं और ज़ाहिर तौर पर financial free भी हैं।
वह चाहते थे कि यह financial secret उनकी बेटी को भी मिले, जिससे उनकी बेटी का भी फायदा हो। इसीलिए, उन्होंने अपने सारे investment lessons को नोट डाउन करना शुरू किया। उनका इरादा था कि जब उनकी बेटी बड़ी होगी, तो वह ये सभी lesson उसके साथ एक दिन letter के फॉर्म में शेयर करेंगे।
फिर एक दिन उनके दोस्त ने ये letters पढ़े और उन्हें सुझाव दिया कि इन लेसन से बहुत सारे लोगों की financial journey में मदद हो सकती है। इसीलिए, Mr Collins ने इन letters को एक blog में transform किया। और फिर आखिरकार ये blog articles एक किताब—The Simple Path to Wealth—में convert हो गए, जो देखते ही देखते best-seller बन गई।
आजकल की जटिल जानकारी से भरी दुनिया में, जहाँ आपको किसी भी विषय पर अनलिमिटेड जानकारी मिल सकती है, लेकिन उस जानकारी को आपको practical रूप में कैसे इस्तेमाल करना है, इसका आपको कोई idea नहीं होगा।
यह किताब wealth create करने का एक बहुत ही सरल तरीका बताती है, जिसे आप वास्तव में उपयोग कर सकते हैं। आपको किसी जटिल रणनीति या बड़े-बड़े नियमों की ज़रूरत नहीं है।
लेखक ने यह किताब एक दोस्त की तरह लिखी है, जो ना आपको डांटती है, ना डराती है, बस रास्ता दिखाती है। यह एक ऐसा रास्ता है जो सीधा है, सच्चा है, और सबके लिए है।
जब लोग financial independence शब्द सुनते हैं, तो ज़्यादातर के दिमाग में सबसे पहले करोड़ों अरबों रुपए और एक luxury lifestyle की तस्वीर आती है।
लेकिन असल में financial independence का मतलब सिर्फ अमीर बनना नहीं है। इसका असली मतलब है आज़ादी। यह उस स्टेट को पाने का नाम है जहाँ काम करना आपका चॉइस हो, मजबूरी नहीं।
Financial freedom आपको मेंटल पीस देती है। सोचिए, सुबह आप alarm clock की इरिटेटिंग आवाज़ से नहीं, बल्कि अपनी मर्ज़ी से जाग रहे हैं। आपके पास यह ऑप्शन है कि आज काम करना है या नहीं, सिर्फ इसलिए क्योंकि आपको अपनी EMI भरनी है या किराया देना है, आपको ऑफिस जाने की ज़रूरत नहीं। यह एक ऐसी investment है जो सिर्फ returns नहीं देती, बल्कि आपको ज़िंदगी का सबसे बड़ा luxury—Freedom—देती है।
यह किताब wealth creation के तीन main lessons देती है, जो तीनों ही बहुत ही महत्वपूर्ण हैं:
1. कर्ज से हर कीमत पर बचें।
2. एक Frugal Lifestyle अपनाएं।
3. निवेश के लिए Index Funds चुनें, क्योंकि यह सरल और समझदार दोनों है।
अगर आप इन तीनों स्टेप्स को दिल से और consistently फॉलो करते हैं, तो आपको financial freedom achieve करने से कोई रोक नहीं सकता; इस बात की गारंटी है।
चलिए, हम इन तीनों pillars को विस्तार से समझते हैं।
Part 02: पहला pillar: कर्ज से आज़ादी
Financial Freedom का सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण pillar है: कर्ज से आज़ादी।
लेखक ने हमें यह सबक अपनी कहानी से सिखाया। यह कई साल पहले की बात है, जब लेखक college से just graguate हुए थे और उन्होंने अपना पहला credit card लिया था। इससे उन्होंने काफी सारी चीजें खरीद लीं, और कुल $300 खर्च कर दिए, जो उस समय पर एक बहुत बड़ी कीमत थी।
जब महीना खत्म हुआ, तो उनको credit card का बिल आया। उसमें एक लंबी लिस्ट थी कि उन्होंने पूरे महीने में क्या-क्या खरीदा, और उनके price भी लिखे थे। सबसे नीचे लिखा था कि उनका बिल टोटल $300 का है। लेकिन लास्ट में सबसे बड़े font में यह भी लिखा था कि minimum payment due $10 है।
यह देखकर लेखक काफी खुश हुए। वह सोचने लगे कि "यह तो बहुत अच्छी स्कीम है"। उन्होंने मन ही मन सोचा कि "मैं अब और बहुत सारी चीजें खरीद सकता हूँ, फिर उनका पेमेंट बाद में कर दूंगा, जब मेरे पास ज्यादा पैसे आएंगे। यह तो बहुत ही ऑसम credit card है!"।
उनकी बड़ी बहन पास में थी। वह बिल देखकर लेखक को खुश होते हुए देखकर सोचने लगी कि यह दुनिया का पहला इंसान होगा जो बिल को देखकर खुश हो रहा है। जब उनकी बहन ने वह बिल चेक किया, तो उनको समझ आया कि यह credit card का minimum payment देखकर खुश हो रहा है।
उनकी बहन ने Mr Collins को वह small print में लिखी हुई लाइन पढ़ने को कहा: बाकी के $290 के लिए उनको 18% का interest चार्ज होगा।
यह देखकर लेखक काफी चौंक गए और गुस्सा भी हुए। उन्हें लगा कि यह बैंक वाले customer को इतना बेवकूफ समझते हैं। लेकिन फिर बाद में जब उन्होंने इस पर research की, तो उन्हें पता चला कि ये बैंक वाले बेवकूफ नहीं हैं। वे इसी तरह लोगों को ज्यादा शॉपिंग करने में trick करते हैं। ताकि लोगों को ज्यादा शॉपिंग करने की habit लग जाए।
परिणाम यह होता है कि काफी सारे लोग अपनी salary का एक बहुत ही बड़ा हिस्सा सिर्फ interest में पे करते रहते हैं। और यही इन बैंक वालों का असली profit होता है।
यह सबक सबसे पहले इसीलिए है, क्योंकि आप investment की गलतियाँ बाद में करोगे। लेकिन अगर आप पैसा save ही नहीं करते हो, या महीने के अंत तक आपके पास कोई पैसा बचता ही नहीं है, तो अगर आप दुनिया के सबसे अच्छे investor भी रहोगे, तो भी वह knowledge आपके किसी काम आएगा नहीं।
क्योंकि savings ही financial freedom का पहला स्टेप होता है। बहुत सारे लोग अपनी ज़िंदगी का एक बहुत बड़ा हिस्सा, जिसे अपनी पूरी 20 साल की उम्र भी save नहीं करते, क्योंकि वे debt trap में फंसे हुए होते हैं। और इसकी शुरुआत हमेशा credit card या EMI पर shopping करने से होती है।
Bank के salesman हमें बार-बार कॉल करके credit card के फ़ायदे गिनाते हैं, लेकिन लोन पर चीज़ें खरीदने के कुछ छुपे हुए नुकसान होते हैं। ये कुछ ऐसे नुकसान हैं, जो आपको अपनी आँखों से दिखेंगे नहीं, इसीलिए इनकी इतनी ज्यादा बातें होती नहीं हैं।
1. लक्ष्य से भटकना और तनाव: जब आप बहुत सारे लोन ले रहे होते हैं, तो आपको हमेशा सिर्फ उन लोन को चुकाने का तनाव होता है। आप अपनी ज़िंदगी के बड़े-बड़े goals, अपने long-term vision और अपने सपनों को भूलकर सिर्फ अगले महीने के बिल पर पूरा फोकस डाल देते हैं।
इससे होगा यह कि आप काफी सालों बाद भी अपनी life में progress हासिल नहीं कर पाओगे, और न ही आगे बढ़ पाओगे। क्योंकि आप बेसिकली एक rat race में एंटर करते हैं, जो कभी खत्म नहीं होती है।
यह टेंशन आपके दिमाग में हमेशा रहता है। जिससे आपका stress-level लगातार बढ़ता रहेगा। काफी लोगों का दिमाग इतना continuous stress ले नहीं पाता और एक समय के बाद उनका brain बिल्कुल शट डाउन हो सकता है।
2. नौकरी की गुलामी: कर्ज की वजह से आप अपनी मौजूदा नौकरी के गुलाम बन जाते हैं। अगर किसी वजह से आपको नौकरी से निकाला जाता है, तो आप फ़ौरन कोई दूसरा कैसा भी जॉब ढूँढ़ते हैं, फिर चाहे वह कम सैलरी वाला हो या कोई खराब नौकरी। आपकी priority आपके करियर से हटकर EMI पेमेंट हो जाती है।
आप उस कंपनी का काम नहीं छोड़ सकते क्योंकि आपको EMI पे करनी है। जब तक आपके ऊपर घर का EMI चल रहा है, तो शायद आप अपने boss को 'FU Money' नहीं बोल पाएंगे।
3. नकारात्मक भावनाएँ और Helplessness: जिस तरह एक smoker, drug, या alcohol addict को नकारात्मक भावनाएँ महसूस होती हैं कि वह अपनी बुरी आदत छोड़ नहीं पाते, और वह इसमें बिल्कुल helpless महसूस करते हैं। जो लोग लोन पर ज्यादा डिपेंडेंट होते हैं, उनको भी उसी तरह के negative emotions महसूस होते हैं।
उन्हें लगता है कि उनकी financial condition बिल्कुल किसी जादू की तरह एक ही रात में अपने आप ठीक हो जाएगी। जबकि असल में ऐसा कुछ होगा नहीं। और फिर वे काफी समय तक उसी debt trap में फंसे रहेंगे।
कर्ज से बाहर निकलने के लिए आपको अपनी lifestyle को एकदम extreme पर लेके जाना पड़ता है। मतलब अपने सारे अनावश्यक खर्चों को रोककर, और अपनी सारी इच्छाओं को पूरी तरह कंट्रोल करके, अपने सारे लोन को चुकाकर, फिर अपनी life को दोबारा बनाना होता है। लेकिन यह सब करने तक आप अपनी ज़िंदगी के काफी सारे कीमती साल खो चुके होंगे।
व्यक्तिगत रूप से कौन अपनी लाइफ का कंट्रोल कितना जल्दी लेता है, और फिर इस लोन की प्रॉब्लम को अपनी लाइफ से क्लियर करता है, यह उस पर निर्भर करता है।
1. सारे loan की लिस्ट बनाएं: सारे लोन को उनके Interest Rate के ऑर्डर में, किसी पेपर या Excel Sheet में लिखें।
उदाहरण के लिए लोन 1 (8%), लोन 2 (12%), लोन 3 (10%)। तो सबसे पहले सबसे अधिक ब्याज वाला लोन 2, फिर लोन 3, और अंत में लोन 1 को पुट करें।
2. अनावश्यक खर्चों को रोकें: Random दोस्तों के साथ cafe जाना, नई movie देखना, हर online sale में अधिकतम चीजें खरीदना आपको बंद करना होगा। उन सारे पैसों को अपने लोन को खत्म करने में लगाएँ।
3. Highest interest rate पर focus करें: सारे loan की EMI समय पर दें। लेकिन सबसे अधिक ब्याज दर वाले लोन में ज्यादा पैसे डालकर उसे जल्दी खत्म करने पर focus करें।
लेखक का मानना है कि यह सबसे सही रणनीति है, क्योंकि इसमें आपके पैसे बचते हैं। (जबकि कुछ विशेषज्ञ छोटे साइज़ के लोन को पहले खत्म करने की सलाह देते हैं, जिसे 'snowball' method कहते हैं, क्योंकि यह psychological boost के लिए अच्छा होता है, लेकिन Mr Collins का मानना है कि यह आपको EMI में ज्यादा पैसे खर्च करवाता है)।
4. Snowball Effect: जैसे ही आपका सबसे highest interest rate वाला loan खत्म हो जाता है, तुरंत ही आपको दूसरे highest interest rate वाले loan को खत्म करना है।
इस रणनीति से आप अपनी financial freedom की दिशा में पहला कदम उठाते हैं।
Part 03: दूसरा pillar: Frugality and FU Money
कर्ज से मुक्त होने के बाद, दूसरा सबसे महत्वपूर्ण कदम है: Frugal life जीना।
सबसे पहले, हमें यह समझना होगा कि हम पैसे को कैसे देखते हैं। Author हमें तीन तरह के लोगों के बारे में बताते हैं:
1. The Spender: Majority लोग इसी कैटेगरी में आते हैं। वे पैसों को सिर्फ इस तरह देखते हैं कि वे उससे क्या-क्या खरीद सकते हैं, जैसे कोई रेस्टोरेंट में जाके कोई टेस्टी खाना खा सकते हो।
2. The Saver: ये लोग सोचते हैं कि मैं ज्यादा खर्च नहीं करता हूँ, तो मैं इसे अपने savings account में जमा कर दूँगा।
3. The Investor: ये लोग सोचते हैं कि मैं इसे कहीं अच्छी जगह invest कर दूँगा, जिसकी वजह से कुछ सालों बाद यह पैसा दो गुना हो जाएगा, फिर चार गुना हो जाएगा, और इसी तरह देखते ही देखते यह एक नोटों का बंडल बन जाएगा।
लेखक कहते हैं कि उनके हिसाब से आप अपने पैसों को जो सबसे बेहतरीन तरीके से देख सकते हैं, वह है FU Money।
FU Money का मतलब है ऐसा पैसा, जिसकी मदद से आप अपनी life की किसी भी टेंशन को या किसी भी समस्या को 'FU' बोलकर आराम से निकाल सकते हैं।
FU Money का मतलब है कि आपके पास इतने पैसे हों, जिससे कि आप अपने boss या फिर अपनी company को यह बोल सको कि "भाड़ में जाइए, मुझे यह नौकरी नहीं करनी है" अगर वो आपको अच्छे से ट्रीट नहीं कर रहे हैं।
लेकिन यह तभी संभव है जब आपके पास इतने पैसे हों जिससे कि आप यह नौकरी न भी करें, तब भी आप पर और आपके परिवार पर कोई समस्या न हो। यह रकम सिर्फ पैसे से नहीं, बल्कि आपके आत्मसम्मान और स्वतंत्रता की भावना से जुड़ी होती है।
यह हमें ना कहने की ताकत देती है। जब आपके पास यह स्वतंत्रता होती है, तो आप अपने जीवन को अपने अनुसार जी सकते हैं।
लेखक हमें दो दोस्तों की कहानी सुनाते हैं। एक बहुत ही smart school friends थे, जिन्होंने अपने career के लिए एकदम अलग-अलग रास्ता चुना था। एक बड़ा होकर भिक्षु या साधु बन जाता है, और दूसरा friend एक राजा के दरबार में शक्तिशाली मंत्री बनता है।
काफी सालों बाद जब ये दोनों मिलते हैं, तो वह शक्तिशाली मंत्री अपने सरल दोस्त से कहता है, "अगर तू राजा को खुश करना सीख लेता, तो तू आज मेरी तरह ऐसी आलीशान जिंदगी जीता"।
तो वह सरल दोस्त हंसते हुए कहता है, "अगर तू मेरी तरह इस साधारण सी life को enjoy करना सीख लेता, तो तुझे किसी राजा की जूतियाँ चाटनी नहीं पड़ती"।
इसका मतलब यह नहीं है कि हमें वास्तव में एक साधु बन जाना चाहिए और सभी चीजों से संन्यास ले लेना चाहिए। इसका मतलब यह है कि हमें बस पैसों के लिए दूसरों पर निर्भर होने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। फिर चाहे वह आप बहुत ऊँचे लेवल पर जाकर करें या फिर छोटे लेवल पर—पैसों के लिए boss को खुश करने के लिए 'Yes boss, yes boss' करना।
FU Money को हासिल करने का रहस्य है Frugality।
Frugality सुनते ही बहुत से लोगों के दिमाग में एक negative image आती है, जैसे कोई कंजूस जो हर चीज में कटौती करता है, मजे नहीं करता और जिंदगी का आनंद नहीं लेता। लेकिन असल में frugality का मतलब कंजूसी नहीं, बल्कि smart spending है।
यह वह कला है जिसमें आप अपनी जरूरतों और चाहतों में फर्क समझते हैं। Frugality का मतलब है कि आपको कोई भी व्यर्थ का खर्च नहीं करना है, खास तौर पर दूसरों को खुश करने या show-off करने के लिए। आपको बस वही पैसा खर्च करना है, जहाँ आपको वास्तव में जरूरत है।
पैसा एक अच्छा नौकर है, लेकिन एक बुरा मालिक। अगर पैसा आपका मालिक बन गया, तो आपका गेम ओवर हो जाएगा।
Frugality का सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि यह आपको अपनी financial journey पर और अपनी जीवन के फैसलों पर नियंत्रण देता है। जब आप अपनी सीमा से नीचे रहते हैं, तो आपके पास हर महीने निवेश करने के लिए ज्यादा पैसा होता है।
Mr Collins ने अपने career में हमेशा अपनी income का 50% से ज्यादा save किया है। कुछ लोगों के लिए उनकी आधी salary save करना संभव नहीं होगा, तो आप अपने हिसाब से थोड़ा कम ज्यादा कर सकते हैं। लेकिन अंत में, आपको अपनी बचत ज्यादा से ज्यादा बढ़ानी है और अपनी खर्च करने की आदतों को नियंत्रित करना है।
Frugality आपको अनावश्यक Lifestyle Inflation से भी बचाती है। Lifestyle inflation तब होता है, जब आपकी income बढ़ने के साथ आपके खर्च भी बढ़ जाते हैं।
उदाहरण के लिए पहले आप ₹30,000 कमाते थे, तो ₹15,000 खर्च करते थे। अब आप ₹70,000 कमाते हैं, तो ₹45,000 खर्च कर रहे हैं। ऐसे में income बढ़ने का फ़ायदा सिर्फ अस्थायी आराम तक सीमित रह जाता है। Financial independence की समय सीमा पर कोई असर नहीं पड़ता।
लेकिन अगर आप frugality रहते हुए अपनी income का बड़ा हिस्सा save और invest करते हैं, तो हर increment आपको financial freedom की ओर धकेलती है।
हमें कोई भी महंगा ख़र्चा करने से पहले अवसर लागत पर ध्यान देना चाहिए। अवसर लागत का सीधा सा मतलब है कि अगर आपके पास दो विकल्प हैं, और आप सिर्फ एक को चुन सकते हैं, तो अगर आप विकल्प 'A' को चुनेंगे, तो विकल्प 'B' के फ़ायदों को आपको त्यागना करना पड़ेगा।
उदाहरण के लिए ₹10 लाख की कार Vs. ₹10 लाख का निवेश अगर आप ₹10 लाख की कार खरीद रहे हैं। कार एक depreciating asset है, जिसकी value हर साल कम होती जाएगी। कार की maintanance, insurance और petrol/desel का खर्च आपको ही देना होगा।
लेकिन अगर आप वही ₹10 लाख सही stock market में invest करते हैं, जो औसतन 15% से ग्रो हो रही है, और आपको dividend भी मिलेगा। तो कार खरीदने का मतलब है कि आप उन ₹10 लाख का capital appreciation और devident त्याग रहे हैं।
अगर आप यह खर्च करने से पहले इस अवसर लागत को calculate करेंगे, तो आप शायद अनावश्यक महंगी चीजों से बचेंगे। यह चीज़ आप हर एक एक्सपेंसिव चीज़ के लिए कर सकते हैं।
Frugality का एक और छिपा हुआ फ़ायदा यह है कि इससे आपकी ज़रूरी retirement corpus भी कम हो जाती है।
Financial freedom का सीधा नियम है कि आपको उतना invest करना है, जिससे आपके annual expenses का 25 से 30 गुना corpus बन जाए (यह 4% नियम का आधार है)।
उदाहरण के लिए अगर आपका सालाना खर्च ₹6 लाख है, तो आपको लगभग ₹1.5 करोड़ से ₹1.8 करोड़ का corpus चाहिए। लेकिन अगर आप frugality अपनाकर खर्च ₹4 लाख कर देते हैं, तो आपका लक्ष्य corpus सिर्फ ₹1 करोड़ से ₹1.2 करोड़ रह जाएगा।
यानी, कम खर्च का मतलब है कम लक्ष्य और कम लक्ष्य का मतलब है जल्दी financial independence।
Part 04: तीसरा pillar: सरल निवेश की रणनीति
कर्ज से मुक्त होने और खर्चों को नियंत्रित करने के बाद, तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण pillar है: सही जगह पर और सरल तरीके से निवेश करना।
लेखक ने stock market से बहुत संपत्ति बनाई है, लेकिन यह करते वक्त उन्होंने बहुत सारी गलतियाँ भी की हैं। जैसे market में गलत समय पर खरीदना और बेचना, या फिर experts पर आँख बंद करके भरोसा करना, या एकदम खराब कंपनियों को चुन लेना।
इन गलतियों से सीखकर, Mr Collins हमें John Bogle की निवेश रणनीति— Index Fund—की सलाह देते हैं। वह कहते हैं कि यह stock market से अच्छा return कमाने का सबसे आसान तरीका है।
Index fund आपका पैसा उन्हीं कंपनियों में invest करता है, जो देश की सबसे बड़ी और सबसे stable कंपनियाँ होती हैं।
उदाहरण के लिए अगर आपको BSE की टॉप 30 कंपनियों में invest करना है, तो आप सीधे Sensex के index fund में invest कर सकते हैं। जब ये 30 कंपनियाँ अच्छा करेंगी और उनका stock price ऊपर जाएगा, तो यह index भी ऊपर जाएगा, और उसी तरह आपका निवेश किया हुआ पैसा भी ऊपर जाएगा।
Index fund का सिद्धांत यह है कि यह किसी index को mirror करता है। जैसे, Nifty 50 index fund उन्हीं 50 कंपनियों के stocks को उसी proportion में खरीदेगा, जैसे वे index में हैं। इसमें कोई भविष्यवाणी नहीं होती, कोई stock picking नहीं होती; सिर्फ पूरे market को जैसा है, वैसा फॉलो करना।
अगर आप ऐतिहासिक रूप से देखें, तो index हमेशा ऊपर जाता है। बीच-बीच में थोड़े उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन long term में market ऊपर ही आता है।
यह एक beginner के लिए, जिसने investment का 'I' भी नहीं देखा हो, या ऐसे expert के लिए जिसे market में ज्यादा समय देना नहीं है और अपनी life को enjoy करना है, बहुत ही अच्छा विकल्प रहता है।
बहुत से लोग सोचते होंगे कि क्यों ना मैं index fund में से कुछ अच्छी कंपनियाँ चुन लूँ, और जो खराब प्रदर्शन करने वाली कंपनियाँ हैं, उनको निकालकर अपना खुद का portfolio बना दूँ।
लेकिन, बात ऐसी है कि index fund में कोई fixed 30 या 50 कंपनियाँ नहीं होती हैं। ये कंपनियाँ समय-समय पर अपने market cap के हिसाब से बदलती रहती हैं। जिन कंपनियों का market cap लगातार बढ़ता रहता है, सिर्फ वही कंपनियाँ index में रहती हैं। और जिन कंपनियों का market cap नहीं बढ़ता है या नीचे गिर जाता है, तो वे index से निकल जाती हैं। उनकी जगह पर, जो अगली कंपनी अच्छा प्रदर्शन करने वाली होती है, वह जगह ले लेती है।
यानी, market ही हमारे लिए खरीदने और बेचने का काम करता रहता है। इसे हम Self-Correction कहते हैं।
Index fund में invested रहना लेखक के हिसाब से सबसे अच्छा idea है, क्योंकि इससे आप वास्तव में एक सरल तरीके से अपनी wealth बनाएंगे, जिसमें आपको खुद कोई गतिविधि करने की ज़रूरत नहीं होगी।
सच्चाई यह है कि ज़्यादातर Active Fund Managers long-term में market को beat नहीं कर पाते। आंकड़े बताते हैं कि 10 साल की अवधि में, 80% से 90% Active Fund Managers अपने benchmark index (जैसे Nifty 50 या S&P 500) को beat करने में fail हो जाते हैं।
1. Low Cost - Expense Ratio: Index funds जीतते हैं, इसके पीछे एक बड़ा कारण है Cost। Active funds में Research team, Analysis tools, और बार-बार trading करने का खर्च होता है। यह खर्च वे आपसे management fee के रूप में लेते हैं, जिसे Expense Ratio कहते हैं।
Active funds में यह अक्सर 1% से 2% तक होता है।
जबकि indux funds में यह 0.1% से 0.3% जैसा बहुत कम होता है।
अगर market 10% return दे रहा है और active fund का expense ratio 2% है, तो आपके हाथ में सिर्फ 8% बचेगा। वहीं, index fund में 0.2% कटेगा और आप लगभग पूरा return पा लेंगे। Long-term में, यह 2% का अंतर करोड़ों का नुकसान बन सकता है—यह compounding का उलटा असर है।
2. Emotions का अभाव: Active managers भी इंसान हैं, और कभी-कभी डर या लालच से प्रभावित होकर फैसले ले लेते हैं। Index fund में ऐसा नहीं होता, क्योंकि इसमें बस एक fix रणनीति होती है। इससे अनावश्यक जोखिम और गलत समय पर खरीदने-बेचने से बचा जा सकता है।
3. Instant Diversification: Index funds आपको तुरंत diversification देते हैं। अगर आपने Nifty 50 Index Fund लिया, तो आप एक ही बार में अर्थव्यवस्था के कई sectors और टॉप कंपनियों में invest हो जाते हैं। यदि एक-दो कंपनियाँ खराब प्रदर्शन भी करें, तो बाकी balance कर देती हैं।
4. Simplicity: Index fund invest का एक बड़ा psychological benefit है Simplicity। आपको यह सोचने की जरूरत नहीं कि कौन सा stock अच्छा है, कौन सा sector तेज़ है, या market कब crash होगा। आप बस हर महीने SIP करते रहें, और बाकी काम market के हवाले छोड़ दें। यह simplicity आपको अनुशासन बनाए रखने में मदद करती है।
अक्सर हम सोचते हैं कि किसी experts या financial advisor से सलाह ली जाए। हमें लगता है कि वे हमसे ज्यादा जानते हैं और हमें सही रास्ता दिखाएंगे।
लेकिन सच्चाई यह है कि Traditional Financial Advice में एक बड़ी समस्या छिपी होती है। Finance industry का एक बड़ा हिस्सा जानबूझकर इसे complex और technical language में बनाता है। जब आपको लगता है कि चीज़ें बहुत मुश्किल हैं, तो आप उनकी services लेने को मजबूर हो जाते हैं।
Problems:
1. Fees और Comissions का खेल: Advisers उन products को recomend करते हैं जिनमें उन्हें ज्यादा comission मिलता है, भले ही वह आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प न हो। यह Conflict of interest हमारी financial growth के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
2. बार-बार खरीदना/बेचना: पारंपरिक सलाह अक्सर आपको बार-बार खरीदने और बेचने के लिए प्रोत्साहित करती है। हर transaction पर brokerage, tax, और अन्य charges लगते हैं। आपको लगता है कि आप Active investing करके ज्यादा कमा रहे हैं, लेकिन वास्तव में आपका पैसा fee और charges में लीक हो रहा होता है।
3. Fear-Based Marketing: वे आपको market crash, inflation, और global uncertainty से डराते हैं। फिर कहते हैं कि उनकी guidance के बिना आप इस खतरनाक समंदर में डूब सकते हैं।
Solution: खुद को सशक्त बनाना। अगर आप basic financial literacy सीख लें, तो आपको महंगी पारंपरिक सलाह लेने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। आपको खुद अपने पैसों के Captain बनना होगा, न कि किसी ऐसे Adviser के जिस पर आप अंधे होकर भरोसा करें।
Part 05: Compound interest का जादू
Compound interest को अक्सर दुनिया का आठवाँ अजूबा कहा जाता है। यह आपकी financial life में जादू कर सकता है।
Compound interest का मतलब है: आपके पैसे पर ब्याज बनता है, फिर उस ब्याज पर भी ब्याज बनता है। और यह प्रक्रिया साल दर साल दोहराई जाती है। शुरुआत में यह धीमा लगता है, लेकिन जैसे-जैसे साल बीतते हैं, इसका असर exponential हो जाता है।
उदाहरण के लिए अगर आपने ₹1 लाख invest किया और उस पर 10% return मिला। पहले साल 10,000 ब्याज मिला। दूसरे साल, ब्याज ₹1 लाख पर नहीं, बल्कि ₹1,10,000 पर मिलेगा, जिससे ब्याज ₹11,000 हो जाएगा। यह cycle जितनी लंबी चलती है, आपका पैसा उतनी तेज़ी से बढ़ता है।
1. समय ही सबसे बड़ा कारक है: Compounding का जादू तभी सही तरीके से काम करता है जब आप long-term invest करते हैं, और बीच में पैसे को निकालते नहीं हैं।
पहले कुछ साल वृद्धि धीमी लगती है, लेकिन 10 से 15 साल के बाद curve ऊपर की तरफ तेजी से मुड़ता है।
Golden Rule: जितना जल्दी शुरू करेंगे, उतना ज्यादा फ़ायदा होगा।
उदाहरण के लिए व्यक्ति A ने 25 साल की उम्र में ₹5,000 हर महीने invest करना शुरू किया और 35 साल की उम्र में बंद कर दिया (सिर्फ 10 साल invest किया)। वहीं, व्यक्ति B ने 35 साल की उम्र में ₹5,000 हर महीने invest करना शुरू किया और 60 साल तक किया (पूरे 25 साल invest किया)। जब दोनों 60 साल के होंगे, तो व्यक्ति A का corpus व्यक्ति B से बड़ा होगा। सिर्फ इसलिए, क्योंकि उसने compounding को ज्यादा समय दिया।
2. Rule of 72: यह जानने के लिए कि आपका पैसा कितने साल में डबल होगा, आप 72 को अपने Annual Interest Rate से divide करें। उदाहरण के लिए अगर आपको 12% return मिल रहा है, तो 72/12 = 6 साल में पैसा डबल हो जाएगा। ₹1 लाख, 6 साल में ₹2 लाख, अगले 6 साल में ₹4 लाख, फिर ₹8 लाख... और इसी तरह बढ़ता जाएगा। यही exponencial growth है।
3. Discipline and Patience: Compounding का सबसे बड़ा दुश्मन है impatience और बार-बार निवेश से बाहर निकलना। जब भी market में गिरावट आती है, कई लोग डर कर पैसा निकाल लेते हैं, और इस तरह compounding का जादू टूट जाता है।
असली संपत्ति तभी बनती है जब आप market के उतार-चढ़ाव में भी invested बने रहते हैं। Warren Buffet कहते हैं कि हर कोई millionaire बन सकता है, बस उसे धैर्य चाहिए।
4. कर्ज का उलटा compounding: Compounding का एक छिपा हुआ सबक यह भी है कि कर्ज भी compound होता है, लेकिन उलटा। अगर आपके ऊपर उच्च ब्याज दर वाला कर्ज है, तो उसका ब्याज भी ब्याज पर लगता है, और आपका loan balance तेज़ी से बढ़ सकता है। इसीलिए, जल्द से जल्द कर्ज खत्म करें और invest जल्दी शुरू करें।
Part 06: Wealth creation के practical tools और roadmap
Invest करने के लिए, आपको तीन basic tools की ज़रूरत है:
1. Stocks: जो आपके invest पर सबसे अच्छे returns देते हैं। जब आप stock खरीदते हैं, तो आप उस company के एक तरीके से partner बन जाते हैं, उस company का एक हिस्सा own करते हैं।
2. Bonds: ये आपके portfolio diversification में मदद करते हैं। Bonds आपको fix returns देते हैं और inflation से बचाने में मदद करते हैं। जब आप bond खरीदते हैं, तो आप कंपनी या सरकार को पैसे उधार देते हैं।
3. Cash: यह आपकी दैनिक ज़रूरतों और Emergency Fund के लिए बहुत ज़रूरी है। आपको बहुत ज्यादा cash bank account में नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इसमें आपको कम ब्याज दर मिलता है।
लेखक का आसान investment plan है: Index fund + Bond + Emergency fund।
आपको invest शुरू करने से पहले तीन सबसे महत्वपूर्ण सवालों के जवाब देने होंगे:
आप किस investment step में हैं?
आप कितना जोखिम लेने में सहज हैं?
आपका निवेश क्षितिज क्या है?
1. Wealth Accumulation Portfolio: यह वह step है जब आप युवा हैं, काम कर रहे हैं, और जोखिम ले सकते हैं।
- FU Money (कम से कम 1 साल का खर्च) जितना जल्दी हो सके, create करें।
- आपको पूरे तरीके से stocks में invest करना है (100% stocks/index funds)।
- इस stage पर आपको bonds पर focus नहीं करना है, क्योंकि आप युवा हैं और highest return चाहते हैं।
2. Wealth Preservation Portfolio: यह वह step है जब आपका active income बहुत कम हो गया है या बंद हो गया है। अब आप अपने निवेश पर जीवन यापन कर रहे हैं।
- Bonds में invest करना शुरू करें (लगभग 25%)।
- Stocks या index funds में 75% invest करें।
- 5% cash रखें।
- हर साल अपने investment से 4% withdraw करें।
Financial independence हासिल करने के लिए आपको कितना corpus चाहिए, यह 4% नियम से तय होता है। इस नियम के अनुसार, आप अपने कुल निवेश के 4% पर आराम से रह सकते हैं, और अगर आप चाहें तो आपको कभी भी पैसों के लिए काम नहीं करना पड़ेगा।
सरल शब्दों में, आपका लक्ष्य यह होना चाहिए कि आप अपने वार्षिक खर्चों का 25 गुना निवेश कर लें।
उदाहरण के लिए मान लीजिए आपका मासिक खर्च ₹2 लाख है (यानी साल का ₹24 लाख)। अगर आप ₹6 करोड़ का portfolio बना लेते हैं, तो आप financial freedom achieve कर लेंगे। क्योंकि ₹6 करोड़ का 4% होता है ₹24 लाख। इससे यह होगा कि अगर आप अपने निवेश से सिर्फ़ 4% भी निकालते हैं हर साल, और बाकी पैसों को grow करने के लिए छोड़ देते हैं, तब भी बिना किसी समस्या के आपके पैसे grow होते रहेंगे और आप financial free live जीते रहेंगे।
Mr Collins ने अपनी बेटी को 10 साल के लिए यह roadmap follow करने की सलाह दी थी:
1. कर्ज से बचें: किसी भी तरह का loan नहीं लेना है।
2. Career पर ध्यान दें: पहला 10 साल अपने career को dedicate करें। अपनी skills को build करने में और अपनी market value बढ़ाने में बहुत hard work करें।
3. सस्ते adventure करें: सस्ते adventure के लिए समय निकालें, जैसे hiking, trekking, river rafting, या अपने देश को बजट में घूमना।
4. खर्च नियंत्रित करें: कभी भी अपनी income से ज्यादा खर्च न करें, क्योंकि wealth बनाने के लिए खर्चों को control करना बहुत ज़रूरी है।
5. Index fund में investment: अपना आधा से ज्यादा income (50%+) index fund में invest करें। Market गिरने का फ़ायदा उठाएँ—जब market गिरा हुआ हो, तो ज्यादा invest करें। लेकिन कभी भी market को time न करें (यानी भविष्यवाणी करने की कोशिश न करें कि कब खरीदें और कब बेचें, यह impossible है)।
अगर उनकी बेटी ऐसा 10 साल तक follow करती है, तो 30 से 35 साल की उम्र के बीच में वह financial independent हासिल कर लेगी।
Part 07: International Investing का अवसर
लेखक ने हमें US के index में invest करने की सलाह दी है, क्योंकि पूरे विश्व में सबसे स्थिर और लगातार बढ़ने वाला market वहीं रहा है।
दोस्तों, अगर आप चाहें, तो आप अपनी Indian Stocks और Indian Index के साथ US के index fund में भी invest कर सकते हैं। इससे आपके portfolio को diversification और सुरक्षा मिल जाएगी।
US stocks में निवेश के फ़ायदे:
1. Fractional Investing: Indian stock market में आपको किसी भी company में invest करने के लिए minimum एक share तो खरीदना ही पड़ता है। लेकिन US stocks में आप एक share का एक छोटा सा हिस्सा भी खरीद सकते हैं। इसे fractional investing कहते हैं।
2. Dollar Appreciation: हमें पता है कि रुपया डॉलर के मुक़ाबले हर साल कमज़ोर होता जा रहा है। जब भी आप US stocks में invest करते हैं, तो आपको stock की सराहना के साथ-साथ रुपये के depreciation का भी फ़ायदा मिलता है।
Conclusion:
दोस्तों, हमने आज सीखा कि अमीर बनने का रास्ता उतना जटिल नहीं है, जितना हमें दिखाया जाता है। यह सरलता और अनुशासन की यात्रा है।
मुख्य सबक (Key Takeaways):
1. कर्ज से दूरी: कर्ज एक नकारात्मक संपत्ति है, और यह आपको नौकरी का गुलाम बना देती है। कर्ज से आज़ादी ही वित्तीय स्वतंत्रता का पहला कदम है।
2. Frugality का महत्व: Frugality का मतलब कंजूसी नहीं, बल्कि smart और conscious खर्च करना है। अनावश्यक दिखावे वाले खर्चों को रोककर अपनी Savings Rate बढ़ाएँ।
3. FU Money: इतना पैसा जमा करें कि आप किसी भी बुरे हालात या boss को 'ना' कह सकें—यह स्वतंत्रता ही असली धन है।
4. Compounding की शक्ति: जल्दी शुरू करें, और लंबे समय तक invested रहें। समय ही compounding का सबसे बड़ा हथियार है।
5. Index fund में निवेश: Long-term में, index funds ज़्यादातर active funds को कम लागत और अधिक diversification के कारण हराते हैं। Market हमेशा ऊपर ही जाता है, इसलिए डर के कारण बीच में अपने share न बेचें।
6. Rule of 4%: अपनी financial independent के लक्ष्य को निर्धारित करने के लिए 4% नियम का उपयोग करें, यानी वार्षिक खर्चों का 25 गुना corpus बनाएँ।
7. सरलता और अनुशासन: निवेश हमेशा सरल होना चाहिए, न कि जटिल। अनुशासन ही है जो हमें किसी भी आर्थिक संकट से बचाता है।
याद रखिए, wealth creation की प्रक्रिया में, आपको अपने खर्चों को समझदारी से manage करना चाहिए। छोटी-छोटी आदतें—जैसे अनावश्यक चीज़ों पर खर्च करने से बचना और पैसे को बचाना और निवेश करना—हमें कर्ज से मुक्ति और financial independent की ओर ले जाती हैं।
यह independent आपको यह यकीन दिलाती है कि आप खुद भी अपने भविष्य के मार्गदर्शक बन सकते हैं।
अगर आप इन तीनों steps को दिल से और consistently follow करते हैं, तो आपको financial freedom achieve करने से कोई रोक नहीं सकता।
अब सवाल यह है कि आप इस journey में किस step से शुरुआत करेंगे?।
आप अपनी राय comment में ज़रूर बताएं। अगर आपको यह video प्रेरणादायक और मददगार लगा हो, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ share करें, ताकि वे भी जल्दी financial freedom हासिल कर लें।
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हम मिलेंगे अगली video में, तब तक के लिए अपना ख्याल रखें। Thanks for watching!
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